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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

Coal India High-Tech Mining: 5G, ड्रोन और AI से बदलेगी कोयला खदानों की तस्वीर, जानें क्या है मास्टर प्लान

भारत की कुल कोयला आवश्यकता का करीब तीन-चौथाई उत्पादन करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) अब पारंपरिक खनन विधियों को छोड़कर अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी अपनी ओपनकास्ट (खुली) और अंडरग्राउंड (भूमिगत) दोनों प्रकार की खदानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), जीआईएस (GIS), ड्रोन टेक्नोलॉजी, 5G नेटवर्क और डेटा एनालिटिक्स का व्यापक इस्तेमाल कर रही है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस डिजिटल बदलाव का मुख्य उद्देश्य कोयला उत्पादन और दक्षता को बढ़ाने के साथ-साथ खदानों में सुरक्षा मानकों तथा पर्यावरण प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना है।

42 घनमीटर फावड़े और 240 टन के डंपर

ओपनकास्ट खदानों के संचालन को अधिक तेज और सुगम बनाने के लिए कोल इंडिया 42 क्यूबिक मीटर क्षमता वाले विशाल फावड़ों (Shovels) और 240 टन क्षमता के बड़े डंपरों जैसी हैवी अर्थ मूविंग मशीनरी (HEMM) को तैनात कर रही है। बिना ब्लास्टिंग के खनन प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए सरफेस माइनर के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मंत्रालय के अनुसार, सरफेस माइनर के प्रयोग से धूल, शोर और कंपन में भारी कमी आती है, जिससे कोयले की रिकवरी और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है। इसके अतिरिक्त, मशीनों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए AI-आधारित ऑपरेटर फटीग (थकान) मॉनिटरिंग सिस्टम, 360-डिग्री कैमरा, प्रॉक्सिमिटी वार्निंग और ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल की जा रही हैं।

यूजी खदानों में लॉन्गवॉल तकनीक पर जोर

भूमिगत खदानों से कोयला निष्कर्षण बढ़ाने के लिए सीआईएल निरंतर खनन (Continuous Mining), लॉन्गवॉल और हाइवॉल प्रौद्योगिकियों का विस्तार कर रही है। उच्च श्रेणी के कोयले को सुरक्षित रूप से निकालने के लिए पेस्ट फिलिंग तकनीक में निवेश किया जा रहा है, साथ ही खदानों के वेंटिलेशन और ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम को भी बेहतर बनाया जा रहा है।

भविष्य की योजनाओं के तहत भूमिगत खदानों में 5G कनेक्टिविटी, डिजिटल ट्विन और स्वायत्त निगरानी रोवर्स (Autonomous Monitoring Rovers) जैसे उपकरणों को लागू करने की तैयारी है, जिससे खदानों की लाइव निगरानी पूरी तरह डेटा-संचालित हो सकेगी।

92 एफएमसी परियोजनाओं में 46 चालू

खदानों से कोयले के लदान और परिवहन को अधिक सुव्यवस्थित करने के लिए फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (FMC) परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। कोल इंडिया द्वारा प्रस्तावित 92 FMC परियोजनाओं में से 46 परियोजनाएं पूरी तरह से चालू की जा चुकी हैं, जिनसे वार्षिक 432 मिलियन टन कोयला प्रबंधन की क्षमता तैयार हुई है।

लगभग ₹27,800 करोड़ के कुल बजट वाली इस योजना का लक्ष्य वित्त वर्ष 2029-30 तक 994 मिलियन टन प्रति वर्ष यांत्रिक लोडिंग क्षमता हासिल करना है, जिससे मैन्युअल लोडिंग और सड़क परिवहन पर निर्भरता कम की जा सके।

आरएंडडी के लिए 1,900 करोड़ रुपये का निवेश

कोल इंडिया ने वित्त वर्ष 2030 तक रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के लिए ₹1,900 करोड़ के भारी-भरकम निवेश का खाका तैयार किया है। इस पहल के तहत प्रमुख आईआईटी संस्थानों के सहयोग से 5G अनुप्रयोगों, कोयला गैसीकरण (Coal Gasification), स्वदेशी सौर सेल, बैटरी रीसाइक्लिंग और ड्राई कोल बेनिफिशिएशन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर शोध किया जा रहा है।

कंपनी का अंतिम लक्ष्य आने वाले वर्षों में एक ऐसा स्वचालित, डेटा-संचालित और कम कार्बन उत्सर्जन वाला खनन ढांचा तैयार करना है जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ सुरक्षित भी हो।

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