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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

गढ़वा सदर अस्पताल का ब्लड बैंक बदहाल, गंभीर मरीजों की जान आफत में, तमाशबीन बना प्रबंधन

Garhwa Sadar Hospital News: झारखंड के स्वास्थ्य दावों की पोल एक बार फिर खुली है। गढ़वा जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल के सरकारी ब्लड बैंक की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिले के इस सबसे बड़े सरकारी चिकित्सालय में रक्त की भारी किल्लत के कारण रोजाना दूर-दराज से आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। सबसे खराब स्थिति गर्भवती महिलाओं और थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की है, जिन्हें समय पर खून न मिलने के कारण उनकी जान पर बन आ रही है। इस बदहाली के बावजूद स्थानीय अस्पताल प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

स्टॉक रूम खाली, डोनर ढूंढने की मजबूरी

मिली जानकारी के मुताबिक, ब्लड बैंक के रेफ्रिजरेटर और स्टॉक रूम में लगभग सभी ब्लड ग्रुप्स का स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो चुका है। आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचे गंभीर मरीजों को सीधे तौर पर कह दिया जाता है कि वे खुद ही डोनर (रक्तदाता) का इंतजाम करें। ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब परिजनों के लिए अचानक शहर में डोनर ढूंढना पहाड़ तोड़ने जैसा साबित हो रहा है। डोनर न मिलने पर मजबूरी में लोगों को निजी ब्लड बैंकों या बिचौलियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो मोटी रकम वसूल कर रहे हैं।

मशीनों की खराबी और संसाधनों का अभाव

सूत्रों का कहना है कि ब्लड बैंक की इस दुर्दशा के पीछे केवल रक्तदाताओं की कमी नहीं, बल्कि तकनीकी खामियां और संसाधनों का घोर अभाव भी है। ब्लड बैंक की कई महत्वपूर्ण मशीनें और उपकरण लंबे समय से तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े हैं। इसके अतिरिक्त, रक्त संग्रहण और जांच के लिए आवश्यक किट्स की ससमय उपलब्धता न होने की वजह से भी काम प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों की भारी कमी के कारण भी व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में बाधा आ रही है।

परिजनों का फूटा गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी

ब्लड बैंक में लगातार मिल रही निराशा और कुप्रबंधन के खिलाफ मरीजों के परिजनों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अस्पताल परिसर में हंगामा कर रहे लोगों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर करोड़ों खर्च करने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत में गरीब जनता को एक यूनिट खून के लिए भी तड़पना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने 48 घंटे के भीतर ब्लड बैंक की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की, तो वे अस्पताल मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना और उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।

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