कोडरमा के चितरपुर जंगल में 17 हाथियों के झुंड ने जमाया डेरा, सटे गांवों में दहशत का माहौल

कोडरमा जिले के चितरपुर वन क्षेत्र में जंगली हाथियों के एक झुंड के पहुँचने से आस-पास के गांवों में डर का माहौल बना हुआ है। हाथियों की मौजूदगी ने न केवल फसलों को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।
जंगल में हाथियों की हलचल से ग्रामीणों में डर ताजा जानकारी के अनुसार, हाथियों का यह दल पिछले कुछ समय से चितरपुर और उसके आस-पास के इलाकों में घूम रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम ढलते ही हाथियों के चिंघाड़ने की आवाजें सुनाई देने लगती हैं, जिससे लोग पूरी रात जागकर गुजारने को मजबूर हैं। जंगली हाथियों ने कई खेतों में घुसकर तैयार फसलों को तहस-नहस कर दिया है, जिससे किसानों को काफी आर्थिक चोट पहुँची है।

वन विभाग ने लोगों को दी सतर्क रहने की सलाह हाथियों की आमद की खबर मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई है। विभाग ने प्रभावित इलाकों के ग्रामीणों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे जंगल की ओर न जाएं और रात के समय घरों से बाहर न निकलें। वन कर्मियों द्वारा हाथियों की लोकेशन को ट्रैक किया जा रहा है ताकि उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खदेड़ा जा सके। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे हाथियों को खुद भगाने या उन्हें पत्थर मारकर उकसाने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे हाथी आक्रामक हो सकते हैं।
मशाल जलाकर और शोर मचाकर हाथियों को भगाने की कोशिश ग्रामीण अपनी सुरक्षा और फसलों को बचाने के लिए पारंपरिक तरीके अपना रहे हैं। रात के समय गांवों की सीमाओं पर मशालें जलाई जा रही हैं और टीन-डब्बे पीटकर शोर मचाया जा रहा है ताकि हाथियों को जंगल के भीतर ही रोका जा सके। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हाथियों के झुंड को जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से दूसरे क्षेत्र में भेजा जाए और जिन किसानों की फसलें नष्ट हुई हैं, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।
हाथियों के हमले का बढ़ता खतरा विगत कुछ दिनों में झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। कोडरमा के इस क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती सक्रियता ने प्रशासन के लिए भी चुनौती खड़ी कर दी है। फिलहाल, वन विभाग के गश्ती दल द्वारा निरंतर निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की जनहानि को रोका जा सके।
