Categories

October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

मुख्य शीर्षक: JSSC की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल: एक ही प्रमाण पत्र पर दो अलग नियम, कहीं मिली नियुक्ति तो कहीं रोका गया रिजल्ट

रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित की जाने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC-NCL) के प्रमाण पत्रों की वैधता को लेकर दोहरे मानदंड अपनाने का मामला प्रकाश में आया है। महिला पर्यवेक्षिका (Lady Supervisor) भर्ती परीक्षा में जहां अद्यतन (Updated) प्रमाण पत्र के आधार पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने की अनुशंसा कर दी गई, वहीं माध्यमिक आचार्य भर्ती परीक्षा में इसी श्रेणी के 50 से अधिक अभ्यर्थियों का परिणाम रोक दिया गया है। आयोग के इस रवैये से नाराज अभ्यर्थियों ने निष्पक्षता और समान नियम लागू करने की मांग की है।

जेएसएससी में गड़बड़ी: परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग

राज्य सरकार वर्तमान में झारखंड में आयोजित होने वाली विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने पर विचार कर रही है। झारखंड के अभ्यर्थी काफी समय से JPSC और JSSC की कार्यशैली में सामने आने वाली विसंगतियों और प्रशासनिक कमियों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने और व्यवस्था में व्यापक सुधार के उद्देश्य से इन तकनीकी खामियों को सामने लाना अत्यंत आवश्यक है ताकि योग्य युवाओं का भविष्य प्रभावित न हो।

इसी कड़ी में, JSSC द्वारा EWS और OBC (NCL) वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए अपनाए जा रहे परस्पर विरोधी नियमों का मामला गरमा गया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुछ भर्ती परीक्षाओं के दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के दौरान आवेदन की अंतिम तिथि तक का प्रमाण पत्र मांगने के साथ-साथ सत्यापन वर्ष का नया प्रमाण पत्र भी मांगा जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर कुछ अन्य परीक्षाओं में केवल सत्यापन वाले वर्ष के प्रमाण पत्र को मान्य मानकर अभ्यर्थियों की अनुशंसा कर दी गई है। एक ही आयोग द्वारा अलग-अलग परीक्षाओं में प्रमाण पत्रों की वैधता पर भिन्न-भिन्न मापदंड लागू करने से कई सफल अभ्यर्थी नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर होने की कगार पर पहुँच गए हैं।

गड़बड़ी का आधार: विज्ञापन में स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव

प्रभावित अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग द्वारा जारी किए जाने वाले भर्ती विज्ञापनों में प्रमाण पत्र की तिथि या वैधता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती है। विज्ञापन में इस बात का कोई विवरण नहीं रहता कि अभ्यर्थियों को किस वित्तीय वर्ष या किस अवधि का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा, ऑनलाइन आवेदन पत्र भरते समय भी किसी प्रकार का प्रमाण पत्र अपलोड नहीं कराया जाता, जिससे अभ्यर्थियों के बीच संशय बना रहता है।

इस गड़बड़ी को ऐसे समझें

महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा में नियुक्ति की कर दी अनुशंसा

महिला पर्यवेक्षिका भर्ती परीक्षा के अंतर्गत दस्तावेज सत्यापन के समय अभ्यर्थियों से अद्यतन (चालू वित्तीय वर्ष का) EWS और OBC (NCL) प्रमाण पत्र स्वीकार किया गया। आयोग ने इसके आधार पर अभ्यर्थियों को योग्य मानते हुए संबंधित विभाग को नियुक्ति के लिए अपनी अंतिम अनुशंसा भी भेज दी।

माध्यमिक आचार्य परीक्षा में रोक दिया गया परिणाम

इसके विपरीत, माध्यमिक आचार्य भर्ती परीक्षा के दौरान उन्हीं नियमों में फेरबदल देखने को मिला। यहाँ कई अभ्यर्थियों द्वारा वर्तमान वर्ष का अद्यतन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के बावजूद, आवेदन की अंतिम तिथि से पूर्व का प्रमाण पत्र न होने का हवाला देकर 50 से अधिक अभ्यर्थियों के परिणाम को रोक दिया गया है। अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब एक ही आयोग दो अलग-अलग परीक्षाओं का संचालन कर रहा है, तो प्रमाण पत्रों की वैधता को लेकर दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है?

About Author

Leave a Reply