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October 26, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

मुख्य शीर्षक: पलामू के राजहरा में मालगाड़ी के बेपटरी होने के 17 घंटे बाद रेल यातायात आंशिक रूप से बहाल

पलामू के राजहरा रेलवे स्टेशन के नजदीक कोयले से लदी एक मालगाड़ी के करीब 15 डिब्बे पटरी से उतर जाने के कारण इस रूट पर रेल परिचालन पूरी तरह बाधित हो गया था। गुरुवार दोपहर करीब 1:15 बजे हुए इस हादसे के बाद शुक्रवार सुबह लगभग 6:00 बजे रिवर्स लाइन के जरिए अपलाइन पर परिचालन दोबारा शुरू किया जा सका। इस दुर्घटना से रेलवे को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, हालांकि राहत की बात यह रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ।

116 वैगन लेकर मुगलसराय जा रही थी मालगाड़ी

राजहरा के स्टेशन मास्टर इंद्रजीत कुमार ने जानकारी दी कि प्रभावित मुख्य रेल लाइन को ठीक करने का काम अभी भी जारी है, लेकिन वैकल्पिक तौर पर रिवर्स लाइन चालू कर दी गई है जिससे मालगाड़ियों की आवाजाही शुरू हो गई है। रेलवे स्टाफ के मुताबिक, तकरीबन 17 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद इस अपलाइन को चालू किया जा सका। इस व्यवधान की वजह से कई यात्री ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। बता दें कि यह मालगाड़ी टोरी स्टेशन से कोयला लादकर 116 वैगनों के साथ मुगलसराय की तरफ जा रही थी, तभी राजहरा स्टेशन के पास वैगन नंबर 18 से 32 तक के डिब्बे अचानक पटरी से नीचे उतर गए। घटना के तुरंत बाद रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और राहत टीमें मौके पर सक्रिय हो गईं।

दुर्घटना के कारणों का खुलासा जांच रिपोर्ट के बाद

हादसे की मुख्य वजह क्या थी, इसकी सटीक जानकारी विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी। सोननगर-बरवाडीह रेलखंड पर यातायात ठप होने के बाद तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरिंग विभाग की टीमों ने ट्रैक को साफ करने और मरम्मत कार्य को तेजी से पूरा करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। रेल प्रशासन का पूरा फोकस क्षतिग्रस्त डिब्बों को हटाने और मुख्य मार्ग को जल्द से जल्द पूरी तरह सुचारू करने पर है।

रेलवे को करोड़ों का नुकसान

मालगाड़ी के डिब्बे पलटने से इस रूट पर परिवहन व्यवस्था चरमरा गई। दुर्घटना के बाद शुरुआती 5 घंटों के भीतर ही लगभग 52 मालगाड़ियों का आवागमन प्रभावित हुआ। रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस परिचालन ठप रहने की वजह से विभाग को 10 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है। इसके अतिरिक्त, कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों के पहिए थमने से आम यात्रियों को भीषण गर्मी में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

रेलवे के पोल और तार क्षतिग्रस्त

इस भीषण डिरेलमेंट के कारण रेलवे ट्रैक के किनारे लगे बिजली के खंभे (ओएचई पोल) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे अप लाइन की विद्युत आपूर्ति और तार पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गए। स्थिति को सुधारने के लिए धनबाद से विशेष तकनीकी मशीनें और नए तार भेजे गए। साथ ही, पलटे हुए डिब्बों को ट्रैक से हटाने के लिए भारी क्रेन भी मौके पर बुलाई गई, जिसके बाद युद्ध स्तर पर मरम्मत का काम पूरा किया गया।

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