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November 3, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

रिपोर्ट का दावा: कोमा में हैं मोजतबा खामेनेई, ईरान के सुप्रीम लीडर ने हमले में एक पैर भी गंवाया

Iran Mojtaba Khamenei Coma: मोजतबा खामेनेई को 8 मार्च को ईरान का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया था.  28 फरवरी को उनके पिता और दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद असेंबली ऑफ काउंसिल द्वारा चुने गए थे. मोजतबा ने सुप्रीम लीडर बनने के 4 दिन बाद अपना पहला भाषण दिया, लेकिन इस समय भी वे खुद सामने नहीं आए. क्योंकि खबरें आई थीं कि 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजरायल के हमलों में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और कोमा में थे. अब एक और रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि वह कोमा में हैं. एक हवाई हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनका कम से कम एक पैर भी काटना पड़ा है.

ब्रिटिश टैबलॉयड द सन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और फिलहाल तेहरान में उनका इलाज चल रहा है. द सन ने अपने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि नए ईरानी नेता का ‘कम से कम एक पैर काटना पड़ा है और उनके पेट या लीवर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है.  ऐसा लगता है कि वह कोमा में भी हैं.’

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह स्पष्ट नहीं है कि मोजतबा खामेनेई 28 फरवरी को हुए उसी हवाई हमले में घायल हुए थे या नहीं, जिसमें उनके 86 वर्षीय पिता की मौत हो गई थी. यह भी बताया गया कि फिलहाल वह ईरान की युद्ध रणनीति का नेतृत्व नहीं कर रहे हैं. अखबार के अनुसार खामेनेई का इलाज तेहरान के सिना यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में कड़ी सुरक्षा के बीच किया जा रहा है. रिपोर्ट में ईरान की राजधानी के एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि नेता की हालत ‘बेहद गंभीर’ है.

सूत्र के अनुसार जिस अस्पताल यूनिट में उनका इलाज हो रहा है, उसे पूरी तरह सील कर दिया गया है और वहां भारी सुरक्षा तैनात की गई है. डॉक्टर लगातार आईसीयू में उनका इलाज कर रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के स्वास्थ्य मंत्री मोहम्मद रजा जफरगंदी, उनके उपचार की निगरानी कर रहे हैं. जफरगंदी युद्ध से जुड़े घावों के इलाज में अनुभवी वरिष्ठ ट्रॉमा सर्जन माने जाते हैं.

कुछ अन्य रिपोर्ट्स में भी किया गया था चोट का जिक्र

पहले ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि अमेरिका-इजरायल के शुरुआती हमलों में मोजतबा खामेनेई घायल हो गए थे. इन्हीं हमलों में उनके पिता, मां, पत्नी, बहन और भतीजी की भी मौत हो गई थी. ईरान के सरकारी टीवी ने उन्हें ‘जानबाज-ए-रमजान’ कहा है, जो आमतौर पर देश की सेवा में घायल हुए व्यक्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया था कि खामेनेई ‘हल्के रूप से घायल’ हुए हैं, जबकि सीएनएन के मुताबिक उनके पैर में फ्रैक्चर, बाईं आंख के आसपास चोट और चेहरे पर मामूली कट लगे हैं.

ईरान का सरकारी टेलीविजन नेतृत्व की मौजूदगी दिखाने के लिए 12 मार्च को एक बयान प्रसारित किया. इसे खामेनेई का सत्ता संभालने के बाद पहला संदेश बताया गया है. यह बयान मोजतबा की जगह एक न्यूज एंकर ने पढ़कर सुनाया. उनके भाषण के दौरान कार्ड बोर्ड से बना उनका एक पुतला सामने रखा गया था. इसमें कहा गया कि ईरान अपने नागरिकों के खून का बदला लेगा और क्षेत्रीय समुद्री मार्गों को निशाना बनाते हुए हमले जारी रखेगा. इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी भी शामिल थी.

क्या ईरान पर चल रहा भूतिया शासन?

उधर खाड़ी देशों पर ईरान के लगातार हमलों के बीच कई तरह की साजिशी थ्योरी भी सामने आई हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि तेहरान पर इस समय एक ‘घोस्ट आयतुल्ला’ का शासन है. द सन के हवाले से एक ईरानी विश्लेषक ने कहा कि देश के सैन्य अभियान सक्रिय नेता के बिना भी जारी रह सकते हैं. विश्लेषक ने कहा, ‘उनके पिता एक ऐसी व्यवस्था छोड़ गए हैं जो अब अपने आप चल रही है और जिसे एक ‘भूत’ की तरह भी चलाया जा सकता है. यही वजह है कि ईरान की मिसाइलें और ड्रोन अब भी उड़ रहे हैं और युद्ध जारी रहेगा.’

Iran का दावा सुप्रीम लीडर ने खुद लिखा भाषण

हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा है कि नए सुप्रीम लीडर का पहला संदेश उन्होंने खुद लिखा था. हालांकि, द सन ने यह भी कहा कि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, क्योंकि ईरान के भीतर इंटरनेट पर कड़ी पाबंदियां हैं और जिस अस्पताल में उनके इलाज की खबर है वहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू है.

डोनाल्ड ट्रंप ने मोजतबा के चुनाव पर जताई नाराजगी

मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर चुने जाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी नाराजगी जताई थी. उन्होंने दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा के लिए कहा था कि वह शांति से नहीं रह पाएंगे. उन्होंने कहा था कि ईरान का अगला सुप्रीम लीडर चुनने में अमेरिका को भी शामिल होना चाहिए. ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुनने में IRGC की बड़ी भूमिका बताई जाती है, उसने असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स पर दबाव डालकर ही मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनावाया है. 

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